भू जल विज्ञान समाधान

  1. उद्योगों और खनन परियोजना हेतु सम्बंधित सरकारी संस्थाओ से भूजल निकास के लिए सहमति हेतु आवेदन का परिचालन ।
  2. सम्बंधित सरकारी संस्थाओ से भूजल निकास की सहमति का नवीनीकरण।
  3. CGWA और CGWB के दिशानिर्देशों के अनुसार विभिन्न प्रकार की परियोजना जैसे उद्योग, खनन शहर और शहरी क्षेत्रों की आवासीय परियोजना आदि के लिए हाइड्रो-जियोलॉजिकल अध्ययन।
  4. घर , न्स्कूल, फॉर्मिंग, कॉलोनियों आदि जैसे परियोजनाओ के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लान तैयार करना।
  5. नवीनतम तकनीक के साथ भूजल जांच: - रिमोट सेंसिंग और जीआईएस, उपग्रह चित्र और नवीनतम उपकरणों के साथ, सभी प्रकार की परंपरागत विधियां
  6. चट्टान में पानी की उपलब्धता सम्बन्धी लक्षणों की जानकारी के लिए पंपिंग टेस्ट।
  7. वाटरशेड प्रबंधन परियोजना।
  8. ट्यूबवेल और बोरवेल का निर्माण।







रेन वाटर हार्वेस्टिंग की आवश्यकता

पृथ्वी ग्रह पर ताजे पानी की मात्रा उपलब्ध पानी की तुलना में बहुत कम है । विश्व का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से भरा हुआ है जिसका केवल 2.5 प्रतिशत ही ताजा है, बाकि बचा पानी सागरों में है जो की खारा है । ताजे पानी का सिर्फ 1 प्रतिशत आसानी से सुलभ है, जिसका बाकि बचा अधिकांश भाग ग्लेशियरों और बर्फ के मैदानों के रूप में हैं। संक्षेप में कह सकते है की विश्व के 6.8 बिलियन लोगों के लिए ग्रह के पानी का केवल 0.007 प्रतिशत हिस्सा ही उपलब्ध है।

विश्व में यदि जल की आपूर्ति केवल 100 लीटर हो, तो ताजे पानी की हमारी उपयोग योग्य पानी की आपूर्ति केवल 0.003 लीटर (एक-आधा चम्मच) होगी। जो कि वास्तव में यह पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति के लिए औसतन 8.4 मिलियन लीटर (2.2 मिलियन गैलन) की मात्रा है, जिसकी आपूर्ति प्राकृतिक जल सम्बंधित (जल) चक्र में लगातार एकत्रित, शुद्ध और वितरित के माध्यम से होती रहती है

जल संकट के पीछे मुख्य कारण

A. A. क्षेत्र में उपलब्ध चट्टानों की सरंचना का भूजल की स्थिति पर प्रभाव ।
B. पानी के संकट के लिए अन्य कारण।
1. जनसंख्या में वृद्धि।
2. जलवायु परिवर्तन।
3. जल संसाधनों की प्रतिस्पर्धा।
4. कृषि की अनुपयुक्त तकनीक ।
5. प्रदूषण में वृद्धि।

वर्षा जल का संग्रहण

वर्षा जल संचयन एक प्रकार की तकनीक है जिसमें वर्षा की बूंदों को एकत्र किया जाता है और भविष्य में उपयोग के लिए संग्रहित किया जाता है, ताकि इन्हें व्यर्थ बर्बाद होने से बचाया जा सके

वर्षा जल का उपयोग
1. भूजल पुनर्भरण
2. बागवानी, पशुधन
3. पीने का उद्देश्य
4. सिंचाई के लिए

वर्षा जल संचयन तकनीक के लाभ

  1. वर्षा जल संचयन की तकनीकी को स्थापित और संचालित करना सरल हैं।
  2. ऐसी तकनीकों का निर्माण करने के लिए स्थानीय लोगों को आसानी से प्रशिक्षित किया जा सकता है, और निर्माण सामग्री भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
  3. निर्माण पश्चात चलाने में आने वाली लागत भी लगभग नगण्य हैं।
  4. इस तकनिकी में छत के ऊपर आमतौर पर एकत्रित होने वाले पानी को आमतौर पर घरेलु उपयोग के लिए उपयुक्त होता है ।
  5. जल संग्रहण में सुधार और व्यर्थ जल बहाव में कमी।
  6. भूजल स्तर और जल प्राप्ति में सुधार।
  7. ग्राम पंचायत / नगरपालिका / नगर निगम जल आपूर्ति से सम्बंधित समस्याओ में कमी आती है ।
  8. भूजल की गुणवत्ता में सुधार।

वर्षा जल संचय के प्रकार

वर्षा जल संचयन के दो तरीके हैं

1. सतह अपवाह संचयन :
शहरी क्षेत्र में वर्षा जल सतही अपवाह के रूप में बहता है। इस क्रिया में बहने वाले जल को रोककर उपयुक्त विधि अपना कर एक्वीफर्स को रिचार्ज करने के लिए उपयोग किया जाता है। 2. रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग
बारिश का पानी जंहा गिरता है उसे संचय करने की एक तकनीकी है । रूफ टॉप हार्वेस्टिंग में घर या बिल्डिंग की छत कैचमेंट बन जाती है जिसके माध्यम से रेनवाटर को घर / बिल्डिंग की छत से इकट्ठा किया जाता है। विधि कम खर्चीली और बहुत प्रभावी है।

रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग में निम्न विधिया है:
1. रिचार्ज पिट
2. रिचार्ज ट्रेंच
3. नलकूप
4. रिचार्ज वेल